घर के मेन गेट पर फंदा लगाकर की खुदकुशी
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ भविष्य के सपनों और घरेलू तनाव के बीच फंसे एक होनहार युवक ने मौत को गले लगा लिया। फतेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र के हरदासपुर गांव में गुरुवार दोपहर उस वक्त मातम पसर गया, जब 20 वर्षीय अश्वनी कुमार का शव उसके ही घर के मुख्य दरवाजे पर लटका मिला। शिक्षा और संघर्ष के बीच जूझ रहे एक युवा का इस तरह चले जाना पूरे इलाके में चर्चा और शोक का विषय बना हुआ है।
दोपहर एक बजे घर के मुख्य गेट पर पसरा सन्नाटा
जानकारी के मुताबिक, नीरज का पुत्र अश्वनी कुमार (20) पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहा था। गुरुवार दोपहर करीब एक बजे, जब घर के अन्य सदस्य अपने कामों में व्यस्त थे, अश्वनी ने अपने दो मंजिला मकान के मेन गेट पर रस्सी का फंदा बनाया और उस पर झूल गया।
कुछ ही देर बाद जब परिजनों की नजर गेट पर पड़ी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में चीख-पुकार के बीच परिजनों ने उसे नीचे उतारा। सांसे चलती देख परिजन उसे तत्काल इलाज के लिए बांगरमऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए। हालांकि, होनी को कुछ और ही मंजूर था; अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सक डॉ. अशोक वर्मा ने प्राथमिक जांच के बाद अश्वनी को मृत घोषित कर दिया।
परीक्षा न दे पाने का मलाल और घरेलू कलह की मार
मृतक के पिता नीरज ने रुंधे गले से बताया कि अश्वनी पढ़ाई में होनहार था। उसने बीएससी की पढ़ाई की थी, लेकिन किन्हीं कारणों से वह अपनी अंतिम परीक्षा नहीं दे पाया था। परीक्षा छूटने के बाद से ही वह गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में चला गया था। उसे अपना भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा था।
पिता के अनुसार, केवल करियर की चिंता ही नहीं, बल्कि घर में आए दिन होने वाली कलह ने भी उसे भीतर से तोड़ दिया था। मां का साया बचपन में ही सिर से उठ जाने के कारण अश्वनी दो भाइयों में बड़े होने के नाते परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर भी अक्सर तनाव में रहता था। पढ़ाई का दबाव और घर की अशांति ने मिलकर एक उभरते हुए युवा को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
बचपन में मां को खोया, अब भाई और पिता हुए अकेले
अश्वनी की मौत ने उसके छोटे भाई और पिता को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि बचपन में मां की मृत्यु के बाद नीरज ने ही बड़े लाड-प्यार से अपने दोनों बेटों को पाला था। अश्वनी से परिवार को बड़ी उम्मीदें थीं कि वह पढ़-लिखकर घर की स्थिति सुधारेगा, लेकिन परीक्षा के दबाव और मानसिक द्वंद्व ने सब कुछ खत्म कर दिया। घटना के बाद से ही घर में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घटना की सूचना मिलते ही फतेहपुर चौरासी थाना पुलिस सक्रिय हो गई। थाना प्रभारी ज्ञानेंद्र कुमार दलबल के साथ अस्पताल पहुंचे और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
थाना प्रभारी ने बताया, “प्रथम दृष्टया मामला घरेलू कलह और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों और समय की पुष्टि हो सकेगी। पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।”
विशेषज्ञों की राय: युवाओं में बढ़ता ‘परफॉर्मेंस प्रेशर’
उन्नाव की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी भी है। मनोचिकित्सकों का मानना है कि आज के दौर में युवाओं पर करियर और परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव है। ऐसे में यदि घर का माहौल भी तनावपूर्ण हो, तो युवा वर्ग जल्दी हताशा का शिकार हो जाता है। अश्वनी की कहानी यह बताती है कि संवाद की कमी और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कितनी जानलेवा साबित हो सकती है।
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