6 महीने से भरा है पानी, 12 हजार ग्रामीण कैद, ट्रैक पार करने को मजबूर
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
उन्नाव: विकास का दावा जब धरातल पर उतरता है, तो कभी-कभी वह जनता के लिए वरदान के बजाय अभिशाप बन जाता है। उन्नाव जिले के कानपुर-बालामऊ रेल मार्ग पर बना रेलवे अंडरपास इसका जीवंत उदाहरण है। बीते छह महीनों से यह अंडरपास लबालब पानी से भरा हुआ है, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों की करीब 12 हजार की आबादी नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी ने ग्रामीणों को मौत के रास्ते (रेलवे ट्रैक) से सफर करने पर मजबूर कर दिया है।
अंडरपास या तालाब? ग्रामीणों की बढ़ी मुसीबत
कानपुर-बालामऊ रेल मार्ग पर स्थित इस अंडरपास को इसलिए बनाया गया था ताकि ग्रामीणों का आवागमन सुगम हो सके, लेकिन जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यह अब एक गहरे तालाब में तब्दील हो चुका है। पिछले छह महीनों से यहां दो से तीन फीट तक पानी जमा है। स्थिति इतनी खराब है कि पैदल चलना तो दूर, बड़े वाहन भी यहां फंस जाते हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जलभराव की वजह से अंडरपास के अंदर की सड़क भी उखड़ चुकी है और पानी में छिपे गड्ढे किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं।
12 हजार की आबादी का रास्ता बंद, ट्रैक पर जोखिम
इस अंडरपास के बंद होने या पानी भरने से लगभग 12 हजार की आबादी प्रभावित है। मुख्य मार्ग से संपर्क टूटने के कारण अब ग्रामीण और बाइक सवार अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार कर रहे हैं। बाइक को ट्रैक के ऊपर से घसीट कर ले जाना और पैदल पटरियों पर चलना यहां की नियति बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि “हम मौत के साए में सफर कर रहे हैं। ट्रैक पार करते समय कब कोई ट्रेन आ जाए, इसका डर हमेशा बना रहता है, लेकिन हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।” रेलवे ट्रैक पार करने के चक्कर में पहले भी कई छोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
6 महीने से आश्वासन, कार्रवाई शून्य
स्थानीय ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार तहसील प्रशासन और रेलवे के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया है। हर बार ‘जल्द निस्तारण’ का आश्वासन मिलता है, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। बारिश के मौसम में तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं। अंडरपास में भरा सड़ा हुआ पानी अब संक्रामक बीमारियों का केंद्र भी बन रहा है। मच्छर पनप रहे हैं और आसपास के घरों में बदबू का साम्राज्य है।
रेलवे और पीडब्ल्यूडी की ‘नूराकुश्ती’ में जनता पस्त
अक्सर ऐसे मामलों में रेलवे प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते नजर आते हैं। रेलवे का कहना होता है कि अंडरपास उन्होंने बना दिया, अब सड़क और ड्रेनेज का काम स्थानीय प्रशासन का है। वहीं, स्थानीय प्रशासन बजट और तकनीकी दिक्कतों का रोना रोता है। इस विभागीय खींचतान और ‘नूराकुश्ती’ के बीच 12 हजार लोगों का बुनियादी अधिकार (रास्ता) छिन गया है।
Truth India Times की विशेष टिप्पणी
डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी के युग में अगर 12 हजार लोगों को एक अदद रास्ते के लिए रेलवे ट्रैक पर जान जोखिम में डालनी पड़ रही है, तो यह सिस्टम के लिए शर्म की बात है। अंडरपास का निर्माण करते समय ‘इंजीनियरिंग’ में हुई चूक अब आम जनता के गले की फांस बन गई है। प्रशासन को चाहिए कि तत्काल पंप सेट लगाकर पानी निकलवाया जाए और भविष्य के लिए एक स्थाई जल निकासी का निर्माण कराया जाए।
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