उन्नाव पीड़िता का छलका दर्द, वीडियो जारी कर कहा- ‘रोज कोर्ट आना मुमकिन नहीं’, कुलदीप सेंगर की याचिका पर 11 से होनी है दैनिक सुनवाई

उन्नाव/दिल्ली: उन्नाव दुष्कर्म मामले की पीड़िता ने शनिवार देर रात एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर अपनी व्यथा साझा की है। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की याचिका पर 11 फरवरी से प्रतिदिन (डे-टू-डे) सुनवाई के फैसले ने पीड़िता की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। वीडियो में पीड़िता ने अदालती कार्यवाही और अपनी घरेलू जिम्मेदारियों के बीच फंसी अपनी जिंदगी की चुनौतियों को उजागर किया है।

‘मुझ पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी’

पीड़िता ने वीडियो में स्पष्ट किया कि वह कानूनी लड़ाई से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन व्यावहारिक कठिनाइयां उसके आड़े आ रही हैं। पीड़िता ने कहा, “हाईकोर्ट ने 11 तारीख से रोज सुनवाई का फैसला लिया है। मेरे लिए हर दिन कोर्ट पहुंचना बहुत मुश्किल है। मुझ पर अपने घर और परिवार की पूरी जिम्मेदारी है। ऐसे में रोज की भागदौड़ और मानसिक दबाव को झेलना मेरे लिए पहाड़ जैसा हो गया है।”

पीड़िता का कहना है कि सुरक्षा कारणों और आर्थिक तंगी के बीच हर दिन उन्नाव से दिल्ली या कोर्ट के चक्कर लगाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। उसके परिवार के कई सदस्य अब इस दुनिया में नहीं हैं, जिसके कारण घर का सारा बोझ उसी के कंधों पर है।


कुलदीप सिंह सेंगर की याचिका और कानूनी पेच

बता दें कि उन्नाव दुष्कर्म कांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ याचिका दायर की है। इसी याचिका पर सुनवाई को तेज करने के लिए कोर्ट ने 11 फरवरी की तारीख तय की है।

मामले के मुख्य बिंदु:

  • सुनवाई की प्रकृति: कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और समय को देखते हुए प्रतिदिन सुनवाई का निर्देश दिया है।
  • पीड़िता की मांग: पीड़िता चाहती है कि सुनवाई की प्रक्रिया में उसकी व्यावहारिक स्थिति और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए।
  • सुरक्षा का घेरा: पीड़िता अभी भी कड़ी सुरक्षा के बीच रहती है, ऐसे में कोर्ट की दैनिक आवाजाही एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती भी है।

न्याय की लंबी लड़ाई और टूटता धैर्य

साल 2017 में हुए इस जघन्य कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सेंगर को सजा मिली, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं का सिलसिला अब भी जारी है। पीड़िता ने वीडियो के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि एक सर्वाइवर के लिए सिर्फ न्याय पाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि न्याय की प्रक्रिया को जीवित रखना भी एक संघर्ष है।

अधिवक्ताओं का मानना है कि यदि पीड़िता रोज कोर्ट आने में असमर्थ है, तो उसके वकील के जरिए पक्ष रखा जा सकता है, लेकिन व्यक्तिगत मौजूदगी से जुड़े कुछ कानूनी पहलुओं के कारण पीड़िता मानसिक रूप से दबाव महसूस कर रही है।

प्रशासनिक और सामाजिक सवाल

प्रलभ शरण चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे एक बार फिर ‘विटनेस प्रोटेक्शन’ और ‘सर्वाइवर सपोर्ट’ सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। क्या हमारा सिस्टम इतना लचीला है कि वह एक ऐसी महिला की मदद कर सके जो अकेले ही सत्ता के रसूखदारों से लड़ रही है और साथ ही अपना घर भी चला रही है?

अब सबकी निगाहें 11 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या अदालत पीड़िता की इन व्यावहारिक दिक्कतों पर संज्ञान लेती है या सुनवाई इसी गति से आगे बढ़ती है।

About The Author


Discover more from Truth India Times

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Related Posts

उन्नाव: जमीन विवाद में बुजुर्ग महिला की संदिग्ध मौत, परिजनों ने बेटे पर लगाया हत्या और बंधक बनाने का गंभीर आरोप

प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times) उन्नाव। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद सनसनी फैल गई है। मृतका…

उन्नाव में अवैध खनन माफियाओं पर प्रशासन का हंटर: गंगाघाट में पोकलैंड और जेसीबी सीज, एडीएम बोले- ‘बख्शे नहीं जाएंगे दोषी’

प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times) उन्नाव | उन्नाव जिले में अवैध खनन के काले कारोबार पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Discover more from Truth India Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading