उन्नाव में भूमाफियाओं पर चला प्रशासन का हंटर: 6.80 करोड़ की सरकारी जमीन कब्जामुक्त, पर क्या रसूखदारों पर होगी FIR?

उन्नाव: उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उन्नाव जिला प्रशासन ने भूमाफियाओं के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। सदर तहसील के ग्राम मनभाऊना में अरबों की सरकारी संपत्ति को अवैध कब्जेदारों के चंगुल से छुड़ा लिया गया है। करीब 7 बीघा जमीन, जिसकी बाजार दर पर अनुमानित कीमत 6 करोड़ 80 लाख रुपये बताई जा रही है, अब वापस सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो गई है। हालांकि, इस कार्रवाई ने प्रशासन की सतर्कता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बुलडोजर ने रौंदी अवैध फसल, कब्जेदार फरार

बुधवार को सदर एसडीएम क्षितिज द्विवेदी और नायब तहसीलदार धीरज त्रिपाठी के नेतृत्व में राजस्व विभाग और गंगाघाट पुलिस की टीम मनभाऊना गांव पहुँची। भारी पुलिस बल को देखकर इलाके में हड़कंप मच गया। सरकारी अभिलेखों में यह जमीन तालाब, बंजर और पशुचर के रूप में दर्ज थी, जिस पर भूमाफियाओं ने न केवल कब्जा कर रखा था, बल्कि उस पर सरसों और गेहूं की लहलहाती फसल भी बो दी थी।

प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध फसल को नष्ट कर दिया और पूरी जमीन का विधिवत सीमांकन कर उसे सरकारी कब्जे में ले लिया। प्रशासन की सख्ती को भांपते हुए कब्जेदार मौके से पहले ही फरार हो गए।

तालाब और पशुचर का अस्तित्व बचाने की चुनौती

ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में तालाब और पशुचर (Charagah) की जमीन रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। मनभाऊना में जिस जमीन को मुक्त कराया गया, वह वर्षों से ग्रामीणों के पशुओं के चरने और जल संरक्षण के लिए आरक्षित थी। भूमाफियाओं ने इस सार्वजनिक संपत्ति को निजी जागीर बना लिया था। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है, क्योंकि अवैध कब्जों के कारण गांव का जल निकासी तंत्र और पशुओं का चारा पूरी तरह प्रभावित हो गया था।

‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ की जांच: सरकार और विभाग से कड़े सवाल

कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन एक खोजी पत्रकार के रूप में कुछ बुनियादी सवाल पूछना अनिवार्य है जिनकी जवाबदेही सरकार को देनी चाहिए:

  1. सालों तक कहाँ सोया था राजस्व विभाग? 7 बीघा जमीन पर फसल बो दी गई, फसल बड़ी हो गई, लेकिन स्थानीय लेखपाल और कानूनगो को इसकी भनक तक नहीं लगी? क्या यह निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव है?
  2. क्या केवल कब्जा हटाना काफी है? प्रशासन ने जमीन तो ले ली, लेकिन क्या अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ एंटी-भूमाफिया एक्ट के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी? क्या इन भूमाफियाओं से पिछले वर्षों का हर्जाना वसूल किया जाएगा?
  3. सिस्टम का फेलियर: उन्नाव में सैकड़ों हेक्टेयर सरकारी जमीन अब भी अवैध कब्जों में है। क्या सरकार के पास कोई ऐसी डिजिटल मैपिंग प्रणाली नहीं है जो सरकारी जमीन पर एक ईंट गिरते ही प्रशासन को अलर्ट कर दे?
  4. कब्जेदारों के रसूख की जांच: फरार हुए कब्जेदार कौन हैं? क्या उन्हें स्थानीय रसूखदारों या नेताओं का संरक्षण प्राप्त है? अक्सर देखा जाता है कि छोटे किसानों पर कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े ‘मगरमच्छ’ बच निकलते हैं।

एसडीएम का सख्त रुख

एसडीएम सदर क्षितिज द्विवेदी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जिले में तालाब, पशुचर और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को चिन्हित करने का अभियान जारी रहेगा। मनभाऊना की तरह अन्य क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी है।”

निष्कर्ष: केवल कार्रवाई नहीं, सुधार चाहिए

उन्नाव की यह घटना राज्य सरकार के उस वादे को पुख्ता करती है कि अपराधी और माफिया अब चैन से नहीं रह पाएंगे। लेकिन प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कब्जा हटने के बाद उस जमीन का सार्वजनिक हित में सही उपयोग हो, अन्यथा कुछ समय बाद फिर से भूमाफिया वहां सक्रिय हो जाएंगे।

6.80 करोड़ की जमीन की वापसी प्रशासन के लिए एक बड़ी जीत है, लेकिन यह जीत तभी मुकम्मल होगी जब दोषी सलाखों के पीछे होंगे और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत पर भी गाज गिरेगी।


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