अपमान का आरोप! SC-ST आयोग सदस्य ने कानपुर महापौर पर लगाया जातिगत दुर्भावना का आरोप, बोले- "वाल्मीकि हूँ, इसलिए पानी भी नहीं पिलाया"
Kanpur/Truth India Times Digital Desk
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC-ST) आयोग के सदस्य रमेश चंद कुंडे ने मंगलवार को कानपुर नगर निगम में हुए कथित अपमान पर गहरा रोष व्यक्त किया है। कुंडे, जो नगर निगम के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करने के लिए कानपुर पहुँचे थे, उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें न केवल जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, बल्कि उनके साथ जातिगत दुर्भावना से प्रेरित दुर्व्यवहार भी किया गया।
कुंडे ने खुलकर कहा, “मैं वाल्मीकि समाज से आता हूँ, शायद इसलिए मुझे इतना अपमान झेलना पड़ा।” यह चौंकाने वाला बयान उन्होंने तब दिया जब नगर निगम पहुंचने पर उन्हें रिसीव करने के लिए कोई भी अधिकारी या प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था। उन्होंने बताया कि उन्हें घंटों तक इंतजार करना पड़ा और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह रही कि इस दौरान उन्हें किसी ने पानी तक नहीं पूछा।
महापौर पर लगाया सीधा आरोप
आयोग के सदस्य ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर महापौर प्रमिला पांडे को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर ने जानबूझकर उनकी बेइज्जती की है। कुंडे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “नगर निगम में एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता है, तो आम दलित या शोषित समाज के व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार होता होगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी उपस्थिति की जानकारी पहले ही दे दी गई थी, इसके बावजूद प्रोटोकॉल का घोर उल्लंघन किया गया।
बैठक से पहले ही विवाद
रमेश चंद कुंडे यहाँ SC/ST से जुड़े मामलों और योजनाओं की समीक्षा के लिए बैठक करने आए थे। लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही इस विवाद ने तूल पकड़ लिया। कुंडे का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोचा समझा अपमान था, जो उनके वाल्मीकि समाज से होने के कारण किया गया। उन्होंने इस घटना को दलित समाज के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान पर चोट बताया है।
आयोग के सदस्य ने कहा कि वह इस पूरे मामले की रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेजेंगे और इस अपमान के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों और प्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।
महापौर की सफाई का इंतज़ार
इस गंभीर आरोप के सामने आने के बाद, कानपुर नगर निगम और महापौर प्रमिला पांडे की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह घटना सत्ताधारी दल के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है, खासकर जब राज्य सरकार दलितों और शोषितों के सम्मान और सशक्तिकरण पर लगातार जोर दे रही है। शहर के राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर चर्चा गर्म है और दलित संगठनों ने आयोग के सदस्य के समर्थन में आवाज़ उठानी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और निगम प्रशासन इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
About The Author
Discover more from Truth India Times
Subscribe to get the latest posts sent to your email.