अस्पताल बना अखाड़ा! वेतन मांगा तो मिलीं लातें और घूंसे; फतेहाबाद CHC में CHO को बेरहमी से पीटने का VIDEO वायरल

आगरा। ताजनगरी आगरा के फतेहाबाद से एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी दफ्तरों में कर्मियों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। फतेहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में वेतन के विवाद को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच ऐसी ‘जंग’ छिड़ी कि अस्पताल परिसर अखाड़ा बन गया। दो कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) को सरेआम बेरहमी से पीटा गया, जिसके वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

यह घटना केवल मारपीट की नहीं है, बल्कि सिस्टम के भीतर पनप रही गुंडागर्दी और तानाशाही का प्रमाण है।

वेतन मांगना पड़ा भारी: लात-घूंसों से हुआ ‘स्वागत’

मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ वेतन भुगतान (Salary Payment) से जुड़ी है। गुरुवार को सीएचओ अपनी मेहनत की कमाई और रुके हुए वेतन को लेकर ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (BPM) से बात करने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान कहासुनी इतनी बढ़ गई कि बीपीएम और उनके समर्थकों ने मर्यादाओं को ताक पर रख दिया।

वायरल हुए दो वीडियो में हिंसा का नंगा नाच साफ देखा जा सकता है:

  1. पहला वीडियो: इसमें CHC के भीतर ही स्वास्थ्य अधिकारियों को बुरी तरह पीटा जा रहा है। सरकारी गलियारों में जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए, वहां कर्मियों का ‘खून’ बहाया जा रहा था।
  2. दूसरा वीडियो: यह वीडियो और भी खौफनाक है, जिसमें अस्पताल परिसर के बाहर एक CHO को जमीन पर गिराकर कई युवक उसे लात-घूंसों से मार रहे हैं। बीच-बचाव करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा।

सिस्टम पर सवाल: रक्षक ही भक्षक बने?

हैरानी की बात यह है कि एक सरकारी संस्थान के भीतर इस तरह की हिंसा हो जाती है और उच्चाधिकारी मौन साधे रहते हैं। क्या अब स्वास्थ्य विभाग में हक मांगना अपराध बन गया है? वायरल वीडियो में दिख रहे हमलावर कौन थे? क्या बीपीएम ने बाहर से गुंडे बुलाए थे या ये विभाग के ही लोग थे? इन सवालों का जवाब अब आगरा स्वास्थ्य विभाग और प्रदेश सरकार को देना होगा।

पुलिस की कार्रवाई: जांच की ‘रस्म’ या न्याय?

घटना के वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई है। फतेहाबाद इंस्पेक्टर तरुण धीमान ने बताया कि पुलिस ने वीडियो साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और संबंधित अधिकारियों पर विभागीय गाज नहीं गिरती, वे असुरक्षित महसूस करेंगे।

सकार और स्वास्थ्य विभाग से सीधे सवाल

यह खबर उत्तर प्रदेश सरकार के लिए एक आईना है:

  • सुरक्षा कहां है? अगर सरकारी डॉक्टर और हेल्थ ऑफिसर अपने ही कार्यस्थल पर सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या?
  • वेतन विवाद क्यों? बजट के बावजूद कर्मचारियों के वेतन में देरी और फिर सवाल पूछने पर उन पर हमला, क्या यह भ्रष्टाचार की ओर इशारा नहीं करता?
  • जवाबदेही किसकी? क्या मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) आगरा और स्वास्थ्य मंत्री इस मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित CHO को न्याय दिलाएंगे?

जनता में आक्रोश

फतेहाबाद के स्थानीय निवासियों और अन्य स्वास्थ्य संगठनों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर हमलावरों और साजिशकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें जेल नहीं भेजा गया, तो वे कार्य बहिष्कार करेंगे।

प्रशासन को यह समझना होगा कि जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने से काम नहीं चलेगा। जब साक्ष्य (वीडियो) सबके सामने हैं, तो कार्रवाई में देरी का कोई औचित्य नहीं बनता।

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