अतर्रा में प्रशासन को ठेंगा! भीषण शीतलहर और 2 जनवरी तक छुट्टी के बावजूद खुले स्कूल: क्या बच्चों की जान से कीमती है ‘फीस का धंधा’?

अतर्रा (बांदा): बुंदेलखंड में हाड़ कंपाने वाली ठंड और जानलेवा शीतलहर का सितम जारी है। कोहरे की सफेद चादर ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है और पारा गोता लगा रहा है। बच्चों की सेहत को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने स्कूलों में ताले लटकाने का आदेश जारी किया था, लेकिन अतर्रा कस्बे के कुछ ‘शिक्षा माफियाओं’ और निजी स्कूल संचालकों के लिए शायद सरकारी आदेश रद्दी के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं हैं।

भीषण ठंड और सरकारी ‘कर्फ्यू’ की अनदेखी

उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों के साथ-साथ बांदा जिले के अतर्रा में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सुबह के समय दृश्यता (Visibility) शून्य के करीब पहुंच रही है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन और स्थानीय तहसील प्रशासन ने 2 जनवरी तक सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए पूर्ण अवकाश घोषित किया था। आदेश स्पष्ट था—नर्सरी से आठवीं तक के बच्चों को इस ठिठुरन भरी ठंड से बचाना है।

लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। सोमवार सुबह अतर्रा की सड़कों पर भारी कोहरे के बीच मासूम बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल बैग लादकर जाते दिखे। कई निजी स्कूल संचालकों ने प्रशासन के आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया और क्लास रूम के दरवाजे खोल दिए।

मुनाफे की भूख या अनुशासन की आड़?

सवाल यह उठता है कि आखिर इन स्कूल संचालकों को किसका संरक्षण प्राप्त है? मौसम विभाग की चेतावनी और चिकित्सकों की सलाह को दरकिनार करना किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि इस भीषण ठंड में बच्चों को निमोनिया, सर्दी-खांसी और ठंड लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे में स्कूल खोलना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के मानवाधिकारों के साथ खिलवाड़ भी है।

अभिभावकों में भी इस बात को लेकर मिला-जुला रोष है। कुछ का कहना है कि स्कूल का मैसेज आने की वजह से उन्हें मजबूरी में बच्चों को भेजना पड़ा, वहीं कुछ ने स्कूल संचालकों की इस हठधर्मी पर सवाल उठाए हैं।

उप जिलाधिकारी (SDM) का कड़ा रुख: अब होगी कार्रवाई!

अतर्रा के उप जिलाधिकारी (SDM) राहुल द्विवेदी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि बच्चों का हित प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम विभाग की रेड वार्निंग और शीतलहर के प्रकोप के बीच किसी भी स्कूल को मनमानी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

SDM राहुल द्विवेदी ने चेतावनी दी है कि जिन स्कूलों ने सरकारी आदेश का उल्लंघन किया है, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। इन स्कूल संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और मान्यता रद्द करने तक की संस्तुति की जा सकती है।

प्रशासन बनाम स्कूल माफिया: कौन भारी?

यह पहली बार नहीं है जब अतर्रा या बांदा जिले में स्कूल संचालकों ने प्रशासन के आदेशों को चुनौती दी हो। अक्सर देखा जाता है कि प्राइवेट स्कूल अपने सिलेबस या परीक्षाओं का बहाना बनाकर ठंड की छुट्टियों में भी बच्चों को बुलाते हैं। लेकिन इस बार शीतलहर का प्रकोप इतना ज्यादा है कि प्रशासन किसी भी ढिलाई के मूड में नहीं है।

निष्कर्ष: ट्रुथ इंडिया टाइम्स की चेतावनी

क्या इन निजी स्कूलों के संचालकों को मासूमों की लाल सुर्ख नाक और कांपते हाथों की कोई फिक्र नहीं है? क्या शिक्षा का मकसद केवल फीस वसूलना रह गया है, चाहे इसके लिए बच्चों की सेहत दांव पर क्यों न लगानी पड़े? ट्रुथ इंडिया टाइम्स प्रशासन से यह मांग करता है कि केवल नोटिस तक सीमित न रहें, बल्कि इन स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाया जाए ताकि भविष्य में कोई भी बच्चों की जान के साथ खेलने की जुर्रत न कर सके।

रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स (Truth India Times)

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