बांदा में ‘गैंग्स ऑफ गड़रिया’: वर्चस्व की जंग में आमने-सामने आए यादव और सिंह! सरेराह चलीं गोलियां, पुलिस ने दबोचे दो ‘तमंचाधारी’ शूरवीर!

बांदा (जसपुरा): उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक बार फिर ‘मूंछों की लड़ाई’ और वर्चस्व की सनक ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दे डाली। जसपुरा थाना क्षेत्र के गड़रिया गांव में दो गुटों के बीच सरेराह हुई फायरिंग से इलाका थर्रा उठा। फिल्मी अंदाज में एक-दूसरे के खून के प्यासे हुए इन ‘बाहुबलियों’ को आखिरकार बांदा पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। 26 दिसंबर की उस खूनी शाम का हिसाब अब पुलिस की फाइलों में दर्ज हो चुका है।

वर्चस्व की आग: जब सिंह और यादव में ठन गई

मामले की शुरुआत 26 दिसंबर की शाम को हुई थी। गड़रिया गांव के रहने वाले अभय सिंह और अभिषेक यादव के बीच किसी पुरानी खुन्नस या मामूली बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई। लेकिन बांदा की माटी में गर्मी जरा जल्दी चढ़ती है। देखते ही देखते बात गाली-गलौज से बढ़कर “इलाके का डॉन कौन?” वाली जंग में तब्दील हो गई।

दोनों पक्षों ने अपने-अपने समर्थकों को फोन कर बुला लिया। चंद मिनटों में गड़रिया गांव की शांति भंग हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों तरफ से पहले तो जमकर ललकार हुई और फिर अचानक तमंचे निकल आए।

सरेराह चलीं गोलियां, बाल-बाल बची जान

वर्चस्व की इस लड़ाई में कानून का खौफ शून्य हो गया। अभय सिंह और अभिषेक यादव ने एक-दूसरे को जान से मारने की नीयत से ट्रिगर दबा दिया। गोलियों की तड़तड़ाहट से गांव में हड़कंप मच गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में दुबक गए। यह कुदरत का करिश्मा ही था कि आमने-सामने हुई इस फायरिंग में गोली किसी को नहीं लगी, वरना 26 दिसंबर की रात गड़रिया गांव लाशों के ढेर का गवाह बन सकता था।

पुलिस की एंट्री और ‘फरार’ खेल

जैसे ही पुलिस को फायरिंग की सूचना मिली, जसपुरा थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। लेकिन पुलिस की आहट पाते ही ये ‘शूरवीर’ अपने तमंचे लहराते हुए खेतों के रास्ते फरार हो गए। मामला गंभीर था, क्योंकि सरेआम फायरिंग ने पुलिस के इकबाल को चुनौती दी थी। बांदा के युवा और सख्त पुलिस अधीक्षक (SP) पलाश बंसल ने मामले का संज्ञान लिया और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जसपुरा पुलिस को कड़े निर्देश दिए।

सोमवार का ‘ऑपरेशन क्लीनअप’: तमंचों के साथ गिरफ्त में आरोपी

SP पलाश बंसल के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने मुखबिरों का जाल बिछाया। सोमवार को पुलिस को कामयाबी हाथ लगी जब मुख्य आरोपी अभय सिंह (पुत्र रामबाबू सिंह) और अभिषेक यादव (पुत्र रामनिवास यादव) को घेराबंदी कर दबोच लिया गया।

पुलिस ने जब इनकी जामा तलाशी ली, तो इनके पास से वही दो अवैध तमंचे और कारतूस बरामद हुए, जिनसे उस शाम मौत का तांडव रचा जाना था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ शस्त्र अधिनियम और जानलेवा हमले की धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।

फरार साथियों की तलाश: पुलिस का रडार ऑन

भले ही मुख्य खिलाड़ी जेल पहुंच गए हों, लेकिन उस शाम उनके साथ गाली-गलौज और माहौल खराब करने वाले अन्य साथी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। जसपुरा पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी और स्थानीय इनपुट के आधार पर अन्य आरोपियों को भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।

निष्कर्ष: ट्रुथ इंडिया टाइम्स का तीखा सवाल

बांदा में आखिर कब तक ये ‘तमंचा कल्चर’ चलता रहेगा? मामूली बात पर सीधे गोली चला देना बताता है कि युवाओं में कानून का डर कम और हथियारों का शौक ज्यादा है। क्या ये गिरफ्तारियां बाकी असामाजिक तत्वों के लिए सबक बनेंगी? या फिर वर्चस्व की ये आग अंदर ही अंदर सुलगती रहेगी? बांदा पुलिस की मुस्तैदी ने एक बड़ी घटना को टाल दिया, लेकिन अवैध हथियारों की सप्लाई चेन को तोड़ना अभी भी बड़ी चुनौती है।

रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स (Truth India Times)

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