बांदा: 5 बीघा जमीन दान दी, लेकिन भूमिपूजन में नाम तक नहीं! बबेरू विधायक बोले- “बेटों की स्मृति का हुआ अपमान”

बांदा। बुंदेलखंड की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब कालिंजर में आठ करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भव्य अंतरराज्यीय बस स्टैंड के भूमि पूजन समारोह से उस व्यक्ति को ही दूर रखा गया, जिसने इस परियोजना के लिए अपनी बेशकीमती जमीन दान की थी। बबेरू से सपा विधायक विशंभर यादव ने भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे अपने परिवार और दिवंगत बेटों की स्मृतियों का अपमान करार दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

ऐतिहासिक नगरी कालिंजर में सात बीघे में बनने वाले इस बस स्टैंड का भूमि पूजन हाल ही में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में नरैनी से भाजपा विधायक ओम मणि वर्मा, ब्लॉक प्रमुख नरैनी मनफूल पटेल और कई अन्य भाजपा नेता व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। लेकिन, कार्यक्रम की अतिथि सूची से उस शख्स का नाम गायब था जिसने इस बस स्टैंड के सपने को साकार करने के लिए अपनी निजी संपत्ति शासन के नाम कर दी थी।

बबेरू विधायक विशंभर यादव का कहना है कि उन्होंने करीब पांच बीघा भूमि इस शर्त पर दान दी थी कि यहां बस स्टैंड बनेगा, जिससे न केवल कालिंजर का विकास होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच परिवहन की राह आसान होगी।

बेटों की स्मृति और बहुओं का त्याग

विधायक विशंभर यादव ने भावुक होते हुए बताया कि यह जमीन उन्होंने विधायक बनने से पहले अपने दिवंगत बेटों की पत्नियों (बहुओं) के नाम से रजिस्ट्री कराई थी। जब बस स्टैंड के लिए बजट स्वीकृत होने के बावजूद जमीन के अभाव में काम रुका हुआ था, तब कालिंजर के तत्कालीन प्रधान ने उनसे मदद मांगी थी।

विधायक ने कहा, “मेरी बहुओं ने बड़े दिल से यह जमीन इसलिए दान की थी ताकि उनके पतियों की स्मृति इस विकास कार्य के साथ अमर रहे। उनकी इच्छा थी कि इस बस स्टैंड का नाम उनके पतियों के नाम पर रखा जाए। लेकिन प्रशासन ने शिष्टाचार की सारी हदें पार कर दीं। मुझे नहीं बुलाना था तो न बुलाते, कम से कम मेरे बच्चों (बहुओं) को तो बुला लिया होता जिन्होंने अपना भविष्य दान कर दिया।”

राजनीतिक ‘क्रेडिट वार’ का शिकार हुआ विकास?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला सीधे तौर पर ‘क्रेडिट’ लेने की राजनीति से जुड़ा है। कालिंजर क्षेत्र नरैनी विधानसभा में आता है, जहां भाजपा का कब्जा है, जबकि जमीन दान करने वाले विधायक समाजवादी पार्टी से हैं। स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर सुगबुगाहट है कि सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल और शिष्टाचार को ताक पर रखकर केवल सत्ताधारी दल के नेताओं को ही तवज्जो दी जा रही है।

विधायक विशंभर यादव ने इसे गहरा मानसिक आघात बताते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्र के हित में जमीन दी थी, लेकिन प्रशासन ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी शिलालेखों और कार्यक्रमों से विपक्ष के योगदान को मिटाने की कोशिश की जा रही है।

विकास की राह में ‘कड़वाहट’

कालिंजर का यह अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 8 करोड़ की लागत से बनने वाली इस परियोजना से हजारों लोगों को सीधा लाभ होगा। लेकिन जिस तरह से इस परियोजना की नींव रखी गई है, उसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या जनहित के कार्यों में भी व्यक्तिगत दान और योगदान को दलगत राजनीति की नजर से देखा जाना चाहिए?

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

इस पूरे प्रकरण पर अभी तक प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। प्रोटोकॉल के तहत क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन जमीन दानदाता को ही दरकिनार कर देना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। विधायक यादव ने साफ किया है कि वे इस मामले को उचित मंच पर उठाएंगे और अपने परिवार के सम्मान की लड़ाई लड़ेंगे।

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