बांदा: जिला अस्पताल में हवाई हमले से बचाव का पूर्वाभ्यास, ‘ब्लैकआउट’ मॉकड्रिल से परखी गई युद्धकालीन तैयारी

उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (नागरिक सुरक्षा अनुभाग) के निर्देशानुसार शनिवार को बांदा जिला अस्पताल परिसर में एक उच्च स्तरीय नागरिक सुरक्षा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति या हवाई हमले के दौरान जान-माल की रक्षा और बचाव कार्यों की प्रभावशीलता को परखने के लिए ‘ब्लैकआउट’ और ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’ का जीवंत प्रदर्शन किया गया। इस अभ्यास के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि यदि भविष्य में कभी शत्रु देश द्वारा हवाई हमला होता है, तो प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नागरिक सुरक्षा दल कितनी तेजी से अपनी प्रतिक्रिया देंगे।

हवाई हमले का सायरन और अस्पताल में ब्लैकआउट

मॉकड्रिल की शुरुआत दोपहर में उस समय हुई जब अचानक पूरे अस्पताल परिसर में हवाई हमले की चेतावनी वाला सायरन गूंज उठा। सायरन बजते ही निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत पूरे अस्पताल की बिजली काट दी गई और ‘ब्लैकआउट’ की स्थिति पैदा की गई। यह अभ्यास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध की स्थिति में प्रकाश स्रोतों को बंद करना शत्रु के विमानों को लक्ष्य पहचानने से रोकने के लिए अनिवार्य होता है।

अंधेरे के बीच ही नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों और अस्पताल के कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। अभ्यास के दौरान यह दिखाया गया कि बिजली न होने की स्थिति में भी गंभीर मरीजों को सुरक्षित स्थानों या बेसमेंट में कैसे स्थानांतरित किया जाए और बिना घबराहट के राहत कार्य कैसे संचालित हों।

बचाव और राहत कार्यों का जीवंत प्रदर्शन

मॉकड्रिल के दौरान एक काल्पनिक स्थिति बनाई गई जिसमें हवाई हमले के कारण अस्पताल के एक हिस्से में आग लगने और मलबे में लोगों के दबे होने की सूचना मिली। इसके तत्काल बाद नागरिक सुरक्षा विभाग के ‘रेस्क्यू स्क्वायड’ ने अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों ने मलबे से घायलों को निकालने के लिए स्ट्रेचर और रस्सियों का उपयोग किया।

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) और उनकी टीम ने ‘कैजुअल्टी वार्ड’ में घायलों के त्वरित उपचार की प्रक्रिया को अंजाम दिया। इसमें ट्राइएज (Triage) प्रणाली का पालन किया गया, जिसके तहत घायलों की स्थिति की गंभीरता के आधार पर उन्हें लाल, पीले और हरे कार्ड दिए गए ताकि सबसे गंभीर घायल को सबसे पहले उपचार मिल सके।

समन्वय और तकनीकी दक्षता की परीक्षा

इस अभ्यास में केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि फायर ब्रिगेड, पुलिस प्रशासन और नागरिक सुरक्षा के विभिन्न प्रभागों ने हिस्सा लिया। मॉकड्रिल के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित रहे:

  • त्वरित प्रतिक्रिया: सायरन बजने और राहत कार्य शुरू होने के बीच के समय (रिस्पॉन्स टाइम) को न्यूनतम करना।
  • संसाधन प्रबंधन: आपात स्थिति में उपलब्ध दवाओं, ऑक्सीजन और एंबुलेंस का कुशलतापूर्वक उपयोग।
  • भीड़ नियंत्रण: अफरा-तफरी के माहौल में आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें शांत रखने का कौशल।
  • संचार व्यवस्था: यदि संचार के आधुनिक साधन ठप हो जाएं, तो वायरलेस और अन्य माध्यमों से संदेशों का आदान-प्रदान।

प्रशासनिक अधिकारियों का निरीक्षण

जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरी मॉकड्रिल का सूक्ष्म अवलोकन किया। उन्होंने स्वयंसेवकों द्वारा इस्तेमाल किए गए बचाव उपकरणों, जैसे हेलमेट, गैस मास्क, फायर एक्सटिंगुइशर और फर्स्ट एड किट की गुणवत्ता की जांच की। अधिकारियों ने बताया कि नागरिक सुरक्षा केवल युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि भूकंप, बाढ़ या भीषण आग जैसी आपदाओं में भी यह दल शासन का मुख्य सहायक होता है।

प्रमुख सचिव के निर्देशों का हवाला देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि बांदा जैसे जनपदों में इस प्रकार के अभ्यास नागरिकों में सुरक्षा की भावना पैदा करते हैं और सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता को अपडेट रखते हैं।

जनहित में नागरिक सुरक्षा का महत्व

नागरिक सुरक्षा विभाग के पदाधिकारियों ने बताया कि इस मॉकड्रिल का एक बड़ा हिस्सा आम जनता को जागरूक करना था। उन्हें यह सिखाया गया कि हवाई हमले के दौरान खुले में न रहकर जमीन पर लेट जाना, कानों को ढक लेना और सुरक्षित आश्रयों की तलाश करना कैसे उनकी जान बचा सकता है।

अस्पताल में मौजूद मरीजों के तीमारदारों ने भी इस ड्रिल को बड़े कौतूहल और ध्यान से देखा। स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया कि वे युद्धकालीन परिस्थितियों में मानसिक दबाव को कैसे झेलें और अपनी ड्यूटी का निर्वहन करें।

निष्कर्ष और फीडबैक सत्र

मॉकड्रिल की समाप्ति के बाद एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें अभ्यास के दौरान रही कमियों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने कुछ तकनीकी सुधारों के निर्देश दिए ताकि वास्तविक संकट के समय कोई त्रुटि न हो। कुल मिलाकर बांदा जिला अस्पताल में आयोजित यह नागरिक सुरक्षा अभ्यास सफल रहा और इसने आपातकालीन सेवाओं की तत्परता को प्रमाणित किया।

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