आधी रात को सड़कों पर उतरे SDM: जसपुरा में कड़ाके की ठंड के बीच अलावों का ‘रियलिटी चेक’, लापरवाह कर्मचारियों में मचा हड़कंप!

बांदा (जसपुरा/पैलानी): बुंदेलखंड में पड़ रही हाड़ कंपाने वाली ठंड और शीत लहर ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जब पारा गिरकर न्यूनतम स्तर पर पहुंच रहा है, तब प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि सड़कों पर सो रहे बेसहारा और राहगीरों को राहत मिले। इसी मिशन के साथ रविवार की रात पैलानी एसडीएम अंकित वर्मा ने जसपुरा क्षेत्र का अचानक रुख किया। बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस औचक निरीक्षण ने सरकारी अमले में खलबली मचा दी।

सर्दी का सितम और SDM का एक्शन

पैलानी और जसपुरा क्षेत्र में रविवार को गलन इतनी बढ़ गई थी कि लोग घरों में कैद होने को मजबूर थे। लेकिन रात के सन्नाटे में एसडीएम अंकित वर्मा खुद सड़कों पर निकले। उन्होंने पैलानी कस्बा, पैलानी डेरा और जसपुरा तिराहा जैसे प्रमुख चौराहों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का मुख्य मकसद यह देखना था कि क्या कागजों पर जल रहे अलाव जमीन पर भी उतनी ही गर्मी दे रहे हैं?

राहत की बात यह रही कि अधिकांश चिन्हित स्थानों पर अलाव जलते हुए पाए गए। लेकिन एसडीएम वहीं नहीं रुके, उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अलाव केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को बचाने के लिए हैं।

“अलाव बढ़ाइए, लापरवाही बर्दाश्त नहीं”— अंकित वर्मा

निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने महसूस किया कि जसपुरा तिराहे जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में अलाव की वर्तमान संख्या नाकाफी है। उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अलाव की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए। विशेष रूप से उन स्थानों को चिन्हित करने को कहा गया जहाँ मजदूर, राहगीर और गरीब तबका रात गुजारता है।

अंकित वर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा— “ठंड की वजह से एक भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होनी चाहिए। अलाव में लकड़ी की पर्याप्त व्यवस्था रहे और इसकी नियमित निगरानी की जाए।”

जनता से सीधा संवाद: क्या सच में मिल रही राहत?

एसडीएम ने केवल अलाव ही नहीं देखे, बल्कि वहां आग ताप रहे स्थानीय लोगों और राहगीरों से बातचीत भी की। उन्होंने पूछा कि क्या अलाव रोज जलाए जा रहे हैं? क्या रैन बसेरों में बिस्तर और कंबल की पर्याप्त व्यवस्था है? प्रशासन का यह मानवीय चेहरा देखकर स्थानीय लोगों ने भी संतोष जताया। हालांकि, कुछ लोगों ने और अधिक स्थानों पर अलाव की मांग की, जिसे एसडीएम ने तुरंत नोट कर संबंधित तहसील कर्मियों को निर्देशित किया।

रैन बसेरों और शीतकालीन सुरक्षा पर पैनी नजर

एसडीएम ने तहसील प्रशासन को निर्देश दिए कि अलाव के साथ-साथ रैन बसेरों की भी नियमित जांच की जाए। वहां साफ-सफाई, पीने के पानी और ओढ़ने के लिए पर्याप्त कंबलों का इंतजाम हर हाल में पुख्ता होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है क्योंकि आने वाले दिनों में कोहरा और ठंड और भी विकराल रूप ले सकती है।

निष्कर्ष: ट्रुथ इंडिया टाइम्स का विश्लेषण

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी फाइलें अलाव की लकड़ियों से भरी रहती हैं, लेकिन हकीकत में सड़कों पर सन्नाटा होता है। ऐसे में एसडीएम अंकित वर्मा का सड़कों पर उतरना एक सकारात्मक पहल है। जसपुरा और पैलानी की जनता के लिए यह राहत भरी खबर है कि प्रशासन उनकी सुरक्षा के लिए सजग है। अब देखना यह है कि एसडीएम के इस कड़े रुख के बाद निचले स्तर के कर्मचारी इस व्यवस्था को कब तक सुचारू बनाए रखते हैं।

रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स (Truth India Times)

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