₹5.70 करोड़ की ठगी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़; इंडोनेशियाई भाषा में बात करते थे ठग, 8 गिरफ्तार

कानपुर | उत्तर प्रदेश के कानपुर में क्राइम ब्रांच ने एक ऐसी सफलता हासिल की है जिसने पूरे देश के साइबर सेल को चौंका दिया है। पुलिस ने एक अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गैंग के सरगना समेत 8 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने कानपुर के तीन प्रतिष्ठित डॉक्टरों से करीब 5.70 करोड़ रुपये की डिजिटल ठगी की थी। पकड़े गए ठग इतने शातिर हैं कि वे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए आपस में ‘इंडोनेशियाई’ भाषा का कोड के रूप में इस्तेमाल करते थे।

लोको कॉलोनी में कार के भीतर चल रहा था ‘कंट्रोल रूम’

कानपुर क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि पुराना कानपुर सेंट्रल स्टेशन रोड स्थित लोको कॉलोनी क्षेत्र में एक संदिग्ध कार काफी देर से खड़ी है और उसमें बैठे युवक लैपटॉप और मोबाइल के जरिए किसी संदिग्ध गतिविधि को अंजाम दे रहे हैं। सटीक सूचना पर जब पुलिस ने घेराबंदी कर कार पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। कार के भीतर से ही पूरा साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से गैंग के सरगना और उसके 7 साथियों को दबोच लिया।

डॉक्टरों को बनाया निशाना: ₹5.70 करोड़ की ‘डिजिटल डकैती’

गिरोह का मुख्य शिकार कानपुर के तीन बड़े डॉक्टर बने। ठगों ने इन डॉक्टरों को निवेश के नाम पर झांसा दिया और धीरे-धीरे उनके खातों से करोड़ों रुपये पार कर दिए। जांच में सामने आया कि ठगों ने इन डॉक्टरों को उच्च रिटर्न का लालच दिया और फर्जी ऐप्स के जरिए उन्हें वर्चुअल मुनाफा दिखाया। जब डॉक्टरों ने पैसा निकालने की कोशिश की, तो उनसे टैक्स और अन्य शुल्कों के नाम पर और पैसे ऐंठे गए। कुल मिलाकर गिरोह ने ₹5.70 करोड़ की जालसाजी की पुष्टि की है।

इंडोनेशियाई भाषा: पुलिस को गुमराह करने का अनोखा तरीका

इस गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात इनका बातचीत करने का तरीका था। क्राइम ब्रांच के अनुसार, ये ठग आपस में संवाद करने के लिए और अपने विदेशी आकाओं से जुड़ने के लिए इंडोनेशियाई भाषा का प्रयोग करते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि यदि कोई उनकी कॉल इंटरसेप्ट भी कर ले, तो उसे उनकी योजना समझ न आए। यह गिरोह न केवल भारत बल्कि विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों के भी संपर्क में था और ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेज रहा था।

हाईटेक उपकरण और दर्जनों सिम कार्ड बरामद

गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से पुलिस ने तकनीकी उपकरणों का जखीरा बरामद किया है। बरामद सामान की सूची इस प्रकार है:

  • लैपटॉप और टैबलेट: भारी संख्या में हाई-एंड लैपटॉप, जिनका उपयोग सर्वर और डार्क वेब एक्सेस के लिए किया जाता था।
  • मोबाइल और सिम कार्ड: दर्जनों मोबाइल फोन और फर्जी पहचान पत्रों पर लिए गए सैकड़ों सक्रिय सिम कार्ड।
  • बैंक खाते: कई फर्जी फर्मों के नाम पर खोले गए बैंक खाते और चेकबुक।
  • नकदी और कार: ठगी के पैसों से खरीदी गई लग्जरी कार और लाखों की नकदी।

गिरोह का ‘मोडस ऑपरेंडी’ (काम करने का तरीका)

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘इन्वेस्टमेंट स्कैम’ के जरिए लोगों को फंसाता था। सबसे पहले ये सोशल मीडिया और डेटा ब्रीच के जरिए हाई-प्रोफाइल लोगों (जैसे डॉक्टर, इंजीनियर) का डेटा निकालते थे। इसके बाद उन्हें कस्टमाइज्ड मैसेज भेजकर जाल में फंसाया जाता था। गिरोह के सदस्य खुद को सीबीआई, ईडी या टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते भी थे।

पुलिस कमिश्नर ने दी शाबाशी

कानपुर पुलिस कमिश्नर ने इस बड़ी कामयाबी पर क्राइम ब्रांच की टीम को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि यह गिरोह एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का छोटा सा हिस्सा है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर दिल्ली, मुंबई और दुबई में बैठे उनके सहयोगियों तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। पुलिस अब इन ठगों के बैंक खातों को फ्रीज कर रही है ताकि पीड़ितों की रकम वापस दिलाई जा सके।

जनता के लिए चेतावनी

प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times) के माध्यम से पुलिस ने अपील की है कि:

  1. किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
  2. निवेश के लालच में आकर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
  3. यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर डराए, तो तुरंत ‘1930’ साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।

यह गिरफ्तारी कानपुर ही नहीं, बल्कि देशभर में सक्रिय साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा झटका है। फिलहाल, सभी 8 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और पुलिस रिमांड पर लेकर उनसे आगे की पूछताछ की जाएगी।


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