“मेरा डेटा लीक हो गया, अब मुझे नहीं जीना”: सिजोफ्रेनिया की शिकार महिला का खौफनाक कदम, 2 बार मौत को लगाया गले; हकीकत या वहम?

: “मेरे मोबाइल का डेटा लीक हो गया है… मेरी प्राइवेट फोटोज अब सबके पास हैं। ऑफिस में लोग मुझे गंदी नजरों से देखते हैं, सब मुझ पर हंसते हैं। अब जीने का क्या फायदा?” यह चीख उस महिला की है जो एक ऐसी अदृश्य जंग लड़ रही है, जहां दुश्मन बाहर नहीं, बल्कि उसके अपने दिमाग के भीतर है। कानपुर में ‘सिजोफ्रेनिया’ (Schizophrenia) जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रही एक कामकाजी महिला ने इसी ‘डेटा लीक’ के खौफ में दो बार अपनी जान देने की कोशिश की। फिलहाल, डॉक्टर और काउंसलर उसकी जिंदगी बचाने के साथ-साथ उसके दिमाग में बैठे इस ‘वहम के जिन्न’ को बाहर निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं।


वहम का जाल: जब सच और कल्पना के बीच की रेखा मिट गई

मामला तब सुर्खियों में आया जब पीड़ित महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। उसने दूसरी बार खुदकुशी की कोशिश की थी। काउंसलिंग के दौरान जो बातें सामने आईं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाली थीं। महिला का मानना है कि उसके मोबाइल को किसी ने हैक कर लिया है और उसकी निजी तस्वीरें सोशल मीडिया या डार्क वेब पर वायरल कर दी गई हैं।

महिला ने रोते हुए काउंसलर से कहा, “जब मैं ऑफिस जाती हूँ, तो मुझे लगता है कि सहकर्मी मेरे बारे में फुसफुसा रहे हैं। वे मेरे फोटोज देख चुके हैं और मुझे नीचा दिखा रहे हैं। सड़कों पर चलते लोग मुझे देखकर हंसते हैं।” हालांकि, जब उसके मोबाइल की तकनीकी जांच की गई, तो डेटा लीक होने का कोई सबूत नहीं मिला। यह सब उसके दिमाग की उपज थी, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ‘डेल्यूजन’ (Delusion) कहा जाता है।

क्या है सिजोफ्रेनिया? मानसिक स्वास्थ्य का सबसे जटिल रूप

सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति वास्तविकता और कल्पना में फर्क नहीं कर पाता।

  • भ्रम (Delusion): रोगी को लगता है कि कोई उसके खिलाफ साजिश रच रहा है या उसे नुकसान पहुँचाना चाहता है।
  • हैलुसिनेशन (Hallucinations): ऐसी आवाजें सुनाई देना जो असल में हैं ही नहीं, या ऐसी चीजें दिखना जो दूसरों को नहीं दिखतीं।
  • व्यवहार में बदलाव: पीड़ित व्यक्ति सामाजिक रूप से कटने लगता है और अत्यधिक शक करने लगता है।

ऑफिस और समाज: ‘गंदी नजर’ का वहम बना जान का दुश्मन

पीड़िता के मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि वह एक सफल पेशेवर महिला थी। बीमारी ने धीरे-धीरे उसके आत्मविश्वास को दीमक की तरह चाट लिया। सिजोफ्रेनिया के मरीजों को अक्सर ‘आईडिया ऑफ रेफरेंस’ (Idea of Reference) होता है—यानी उन्हें लगता है कि दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है (जैसे टीवी पर समाचार या किसी की हंसी), वह उन्हीं के बारे में है। डेटा लीक का डर आज के डिजिटल युग का एक ‘मॉडर्न डेल्यूजन’ बन गया है, जो मानसिक रोगियों को जल्दी अपनी चपेट में ले लेता है।


काउंसलिंग और इलाज: एक लंबी और कठिन राह

महिला की वर्तमान में गहन काउंसलिंग और मनोरोग चिकित्सा (Psychiatric Treatment) चल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि सिजोफ्रेनिया के मरीजों को अकेले छोड़ना घातक हो सकता है।

  • दवाइयों की भूमिका: एंटी-साइकोटिक दवाएं दिमाग के उन रसायनों (जैसे डोपामाइन) को संतुलित करती हैं जो इन भ्रमों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • परिवार का साथ: काउंसलिंग के दौरान यह पाया गया कि परिवार को भी इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं थी। वे इसे केवल ‘डर’ या ‘तनाव’ समझ रहे थे, जबकि यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है।

प्रलभ शरण चौधरी की ‘संजीदा’ राय (Truth India Times)

आज के दौर में हम ‘डेटा सुरक्षा’ पर तो करोड़ों खर्च कर रहे हैं, लेकिन ‘दिमागी सुरक्षा’ पर हमारा ध्यान शून्य है। अगर किसी को लगता है कि उसकी फोटो लीक हो गई है और वह बार-बार ऐसी बातें कर रहा है, तो उसे ‘पागल’ कहकर ठुकराएं नहीं। हो सकता है वह मदद के लिए पुकार रहा हो। इस महिला का दो बार सुसाइड अटेम्ट करना यह दर्शाता है कि उसका मानसिक दर्द शारीरिक दर्द से कहीं ज्यादा बड़ा था।

चेतावनी के संकेत: इन्हें न करें नजरअंदाज

यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति:

  1. अचानक बहुत ज्यादा शक करने लगे।
  2. कहे कि उसे कोई देख रहा है या उसका पीछा कर रहा है।
  3. मोबाइल या लैपटॉप को लेकर जरूरत से ज्यादा डरा हुआ दिखे।
  4. बार-बार खुद को नुकसान पहुँचाने की बात करे। …तो उसे तुरंत किसी मनोचिकित्सक (Psychiatrist) के पास ले जाएं।

नोट: यदि आपके मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं या आप किसी मानसिक संकट से जूझ रहे हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर ‘9152987821’ (iCall) या ‘14416’ (Tele-MANAS) पर संपर्क करें। आप अकेले नहीं हैं।

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