कानपुर में DM का ‘रवि किशन’ अवतार: रैन बसेरे में वसूली का खेल पकड़ा, फोन किया तो खुला ₹20 का राज; गंदे कंबलों पर अफसरों को धोया!

कड़ाके की ठंड में जब गरीब और बेसहारा लोग सरकारी मदद की उम्मीद में रैन बसेरों का रुख करते हैं, तो वहां बैठे सफेदपोश ‘सिस्टम के दीमक’ उनकी मजबूरी का सौदा करने से बाज नहीं आते। कानपुर के जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह जब रविवार सुबह 8 बजे अचानक घंटाघर स्थित रैन बसेरे की ‘हकीकत’ परखने पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कागजों पर ‘सब चंगा सी’ दिखाने वाले अफसरों की पोल तब खुल गई जब डीएम ने खुद फोन उठाकर रैन बसेरे में रुकने वाले एक शख्स को कॉल मिला दिया।


“साहब, फ्री नहीं है… ₹20 देने पड़े” – खुल गई भ्रष्टाचार की पोल

रविवार सुबह जब पूरा शहर नींद से जाग ही रहा था, डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह औचक निरीक्षण (Surprise Raid) के लिए घंटाघर शेल्टर होम पहुँच गए। वहां तैनात कर्मचारी हक्के-बक्के रह गए। डीएम ने सबसे पहले ‘रजिस्टर’ अपने कब्जे में लिया। रजिस्टर में कई लोगों के रुकने का ब्यौरा दर्ज था, लेकिन रैन बसेरा खाली-खाली नजर आ रहा था।

संदेह होने पर डीएम ने रजिस्टर में दर्ज एक मोबाइल नंबर पर खुद कॉल मिलाया। दूसरी तरफ से जब रुकने वाले व्यक्ति ने फोन उठाया, तो डीएम ने सीधे पूछा— “क्या रैन बसेरे में रुकने के पैसे लिए गए थे?” जवाब सुनकर डीएम सन्न रह गए। व्यक्ति ने बताया कि उससे रुकने के नाम पर ₹20 वसूले गए हैं। सरकार की मुफ्त सेवा को ‘वसूली का अड्डा’ बनाने की इस सच्चाई ने प्रशासन के दावों के परखच्चे उड़ा दिए।

गंदे कंबल और बदबूदार चादर: गरीबों के साथ ‘अमानवीय’ मजाक

सिर्फ वसूली ही नहीं, रैन बसेरे के भीतर की स्थिति नरक से कम नहीं थी। कड़कड़ाती ठंड में गरीबों को ओढ़ने के लिए जो कंबल दिए जा रहे थे, वे इतने गंदे और बदबूदार थे कि वहां खड़ा होना मुश्किल था। चादरों पर महीनों की गंदगी जमी थी।

डीएम ने मौके पर ही जिम्मेदारों को आड़े हाथों लिया और जमकर फटकार लगाई। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “क्या आप लोग अपने घरों में ऐसे कंबल इस्तेमाल करेंगे? अगर नहीं, तो गरीबों के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार क्यों? सरकार फंड दे रही है, तो सफाई और सुविधाएं क्यों नहीं?” डीएम ने तत्काल सभी कंबलों और चादरों को बदलने और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए।


अफसरों की ‘कुंभकर्णी’ नींद पर डीएम का प्रहार

निरीक्षण के दौरान रैन बसेरे में न तो अलाव की पर्याप्त व्यवस्था दिखी और न ही रुकने वालों के लिए बुनियादी सुविधाएं। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सख्त लहजे में कहा कि रैन बसेरे गरीबों को राहत देने के लिए हैं, न कि कर्मचारियों की जेब भरने के लिए।

  • लापरवाही पर एक्शन: डीएम ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
  • वसूली करने वालों पर FIR की तैयारी: रैन बसेरे में अवैध तरीके से पैसे वसूलने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी गई है।

स्मार्ट सिटी में ‘सफेद हाथी’ बने शेल्टर होम?

कानपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के शोर के बीच घंटाघर जैसे व्यस्त इलाके में स्थित रैन बसेरे की यह हालत व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। यह सिर्फ एक रैन बसेरे की कहानी नहीं है, बल्कि शहर के कई अन्य शेल्टर होम्स की स्थिति भी ऐसी ही बताई जा रही है।

  • कहाँ गया फंड? हर साल नगर निगम और प्रशासन रैन बसेरों के रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च करता है। लेकिन जमीन पर न तो साफ बिस्तर मिलते हैं और न ही सम्मान।
  • बिचौलियों का बोलबाला: शेल्टर होम्स में केयरटेकर और आउटसोर्सिंग कर्मचारी अपनी मनमर्जी चला रहे हैं, जिन पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है।

प्रलभ शरण चौधरी की ‘तीखी’ राय (Truth India Times)

डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह का यह ‘एक्शन मोड’ काबिले तारीफ है। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक दिन के निरीक्षण से व्यवस्था सुधरेगी? जब तक भ्रष्टाचार में लिप्त इन ‘छोटे प्यादों’ के साथ-साथ उन बड़े अफसरों पर गाज नहीं गिरेगी जो दफ्तरों में बैठकर ‘ऑल इज वेल’ की रिपोर्ट साइन करते हैं, तब तक गरीबों का शोषण होता रहेगा। ₹20 की यह वसूली बताती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, जहां एक गरीब की रात की छत को भी नहीं बख्शा गया।

आगे क्या होगा?

डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि अब शहर के सभी रैन बसेरों की औचक जांच की जाएगी। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी सुविधा के बदले पैसे की मांग करता है, तो सीधे प्रशासन को सूचित करें। अब देखना यह है कि घंटाघर रैन बसेरे के दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है या फिर ‘सॉरी सर’ कहकर मामला दबा दिया जाएगा।


रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times

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