माघ मेले के नाम पर शुक्लागंज की बलि? गंगा का बढ़ता जलस्तर और तेज कटान बना काल, प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा खतरा

उन्नाव/शुक्लागंज: आस्था और व्यवस्था के बीच जब तालमेल बिगड़ता है, तो उसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। प्रयागराज में आयोजित होने वाले माघ मेले की भव्यता और पौष पूर्णिमा के पावन स्नान के लिए श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल मुहैया कराने की सरकार की मंशा सराहनीय है, लेकिन इस ‘पुण्य’ के पीछे छिपा ‘संकट’ अब शुक्लागंज के निवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। पश्चिमी घाटों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी ने शुक्लागंज में गंगा के रौद्र रूप की आहट दे दी है, जिससे न केवल जलस्तर बढ़ा है, बल्कि कटान और जलकुंभी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी प्रहार करना शुरू कर दिया है।

आंकड़ों में बढ़ता खतरा

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आधिकारिक आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि खतरा धीरे-धीरे दहलीज पार कर रहा है। गुरुवार सुबह आठ बजे जहां शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 108.600 मीटर दर्ज किया गया था, वहीं शुक्रवार दोपहर तक यह बढ़कर 108.680 मीटर पहुंच गया। शनिवार को भी यह ग्राफ थमा नहीं है। हालांकि प्रशासन इसे ‘नियंत्रित वृद्धि’ बता रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। गंगा की लहरें अब किनारों को अपनी आगोश में लेने को आतुर हैं।

कटान की मार: उजड़ते आशियाने और प्रशासन की बेरुखी

शुक्लागंज में रेलवे पुल से लेकर पुराने यातायात पुल के बीच का तटीय क्षेत्र ‘डेंजर जोन’ में तब्दील हो चुका है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही जलधारा का वेग इतना तीव्र हो गया है कि मिट्टी का कटान तेज गति से हो रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हर साल पानी छोड़े जाने के समय यही स्थिति बनती है, लेकिन सरकार ने आज तक स्थायी रूप से ‘एंटी-इरोजन’ (कटान रोधी) कार्य नहीं करवाए हैं।

नदी के किनारे बसे दर्जनों घर अब सीधे खतरे की जद में हैं। यदि कटान की यही रफ्तार जारी रही, तो न केवल निजी संपत्ति बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों (पुलों के आधार) को भी नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन केवल निगरानी की बात कर रहा है, जबकि जरूरत पत्थरों की क्रेटिंग और बोल्डर बिछाने की है। क्या सरकार किसी बड़ी आपदा का इंतजार कर रही है?

जलकुंभी का जाल: नाविक और मछुआरे बेहाल

पानी बढ़ने के साथ-साथ ऊपरी इलाकों से भारी मात्रा में बहकर आई जलकुंभी ने शुक्लागंज के घाटों पर डेरा डाल दिया है। पूरी नदी की सतह पर हरी चादर बिछ गई है, जिसने नाविकों और मछुआरों के जीवन को ठप कर दिया है। जलकुंभी के घने जाल में नावों के चप्पू फंस रहे हैं, जिससे आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। मछुआरों के लिए जाल डालना नामुमकिन हो गया है, जिससे उनकी दैनिक रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने अब तक इस जलकुंभी की सफाई के लिए किसी भी आधुनिक ‘वीड हार्वेस्टर’ या सफाई दल की तैनाती नहीं की है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संकट

रुका हुआ पानी और सड़ती जलकुंभी बीमारियों को न्योता दे रही है। घाटों पर जलकुंभी जमा होने से पानी में ऑक्सीजन की कमी (BOD लेवल) होने की आशंका है, जिससे जलीय जीवों के जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ जल सुनिश्चित करने के फेर में शुक्लागंज की जनता को गंदे और ठहरे हुए पानी के बीच रहने को मजबूर किया जा रहा है।

सरकार और प्रशासन से चुभते सवाल

यह खबर केवल एक सूचना नहीं, बल्कि सरकार के लिए ‘वेक-अप कॉल’ है।

  1. स्थायी समाधान क्यों नहीं? हर साल माघ मेले के लिए पानी छोड़ा जाता है, तो फिर शुक्लागंज में कटान रोकने के लिए पक्की दीवार या बोल्डर पिचिंग का काम क्यों नहीं किया गया?
  2. मुआवजा और सुरक्षा: जिन किसानों और निवासियों की जमीन कटान की भेंट चढ़ रही है, उनके लिए सरकार की क्या योजना है?
  3. सफाई व्यवस्था: गंगा को स्वच्छ रखने का दावा करने वाला ‘नमामि गंगे’ मिशन इस समय शुक्लागंज की जलकुंभी पर मौन क्यों है?

निष्कर्ष: समय रहते चेतना होगा

प्रयागराज में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की आस्था जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण शुक्लागंज के नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा भी है। अधिकारियों द्वारा ‘स्थिति पर नजर रखना’ काफी नहीं है। धरातल पर बचाव कार्य शुरू होने चाहिए। कटान रोकने के लिए तत्काल ‘सैंड बैग्स’ और पत्थरों की व्यवस्था की जाए और जलकुंभी को हटाने के लिए अभियान चलाया जाए।

यदि आज प्रशासन और सरकार नहीं जागे, तो आने वाले दिनों में यह ‘नियंत्रित जलस्तर’ अनियंत्रित तबाही का कारण बन सकता है। जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं है।

About The Author


Discover more from Truth India Times

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Related Posts

उन्नाव: जमीन विवाद में बुजुर्ग महिला की संदिग्ध मौत, परिजनों ने बेटे पर लगाया हत्या और बंधक बनाने का गंभीर आरोप

प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times) उन्नाव। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद सनसनी फैल गई है। मृतका…

उन्नाव में अवैध खनन माफियाओं पर प्रशासन का हंटर: गंगाघाट में पोकलैंड और जेसीबी सीज, एडीएम बोले- ‘बख्शे नहीं जाएंगे दोषी’

प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times) उन्नाव | उन्नाव जिले में अवैध खनन के काले कारोबार पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Discover more from Truth India Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading