उन्नाव में रेलवे का 'बुलडोजर' एक्शन: 1000 से अधिक मकानों पर चलेगा पीला पंजा, HC के आदेश के बाद मचा हड़कंप
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उन्नाव के हजारों लोगों के सिर से छत छिनने का खतरा मंडराने लगा है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद उत्तर रेलवे ने अपनी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए कमर कस ली है। शहर से लेकर शुक्लागंज और मगरवारा तक रेलवे की भूमि पर बने 1000 से अधिक अवैध कच्चे-पक्के मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों और दुकानों को चिह्नित किया गया है। रेलवे प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब नोटिस की मियाद खत्म हो चुकी है और जल्द ही बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
ट्रैक की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल का जाल
कानपुर-लखनऊ रेल रूट पर गंगाघाट से लेकर जैतीपुर के बीच रेलवे की बेशकीमती जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण है। रेलवे अब अपनी संपत्ति की सुरक्षा और रेल परिचालन को सुरक्षित बनाने के लिए ट्रैक के दोनों ओर बाउंड्रीवाल (सीमा रेखा की दीवार) का निर्माण करा रहा है। इसी निर्माण के दौरान रेलवे के सीमांकन में सैकड़ों ऐसे मकान और ढांचे सामने आए हैं, जो रेलवे की सीमा के भीतर बने हुए हैं। कई जगहों पर दीवारों का काम इन अवैध निर्माणों की वजह से ही रुका पड़ा है।
अतिक्रमण की वर्तमान स्थिति: एक नज़र में (Data Chart)
| प्रभावित क्षेत्र | अतिक्रमण का प्रकार | वर्तमान स्थिति |
| राजीव नगर खंती (गंगाघाट) | 800+ कच्चे-पक्के मकान | नोटिस जारी, कार्रवाई लंबित |
| लोकनगर & गांधी नगर | पक्के मकान व स्थायी ढांचे | दीवार निर्माण में बाधक, रेड मार्किंग पूर्ण |
| मगरवारा स्टेशन | झोपड़ियां व दुकानें | पूर्व में कार्रवाई हुई, पुनः कब्जा चिह्नित |
| गंजमुरादाबाद (हाल्ट) | तिरपाल व अस्थायी झोपड़ियां | बेदखली की अंतिम चेतावनी जारी |
| ईदगाह मोहल्ला | रेलवे ट्रैक के पास अवैध निर्माण | सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील श्रेणी में |
रेलवे की दो टूक: ‘सुरक्षा से समझौता नहीं’
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के DRM सुनील कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि रेल ट्रैक के किनारे अतिक्रमण न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह यात्रियों और ट्रेन सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।
उन्होंने बताया कि:
“कई स्थानों पर लोगों ने रेल की पटरी के इतने करीब मकान बना लिए हैं कि वहां कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को पहले ही कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं। अब कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए अभियान चलाकर जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त कराया जाएगा।”
नोटिस का दौर खत्म, अब कार्रवाई की बारी
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के इंस्पेक्टर हरीश कुमार के अनुसार, लोकनगर, गांधी नगर और शुक्लागंज क्षेत्र में मकान स्वामियों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके बावजूद लोगों ने निर्माण नहीं हटाया। अब प्रशासन जिला पुलिस की मदद से भारी पुलिस बल और बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचेगा। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि ध्वस्तीकरण के दौरान होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी स्वयं कब्जाधारकों की होगी।
प्रभावित परिवारों में दहशत का माहौल
रेलवे की इस सख्त तैयारी के बाद प्रभावित मोहल्लों में बेचैनी बढ़ गई है। राजीव नगर खंती जैसे इलाकों में, जहां पीढ़ियों से लोग रह रहे हैं, वहां अब भविष्य को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं। कई परिवारों का दावा है कि उनके पास बिजली के बिल और अन्य दस्तावेज हैं, लेकिन रेलवे का कहना है कि जमीन के रिकॉर्ड में यह हिस्सा ‘रेलवे लैंड’ के रूप में दर्ज है, जिस पर कोई भी निजी निर्माण अवैध है।
क्या है प्रशासनिक योजना?
रेलवे सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई को चरणों में विभाजित किया गया है:
- प्रथम चरण: उन ढांचों को हटाना जो बाउंड्रीवाल के निर्माण में सीधे बाधा बन रहे हैं।
- द्वितीय चरण: ट्रैक के 15-20 मीटर के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों का सफाया।
- तृतीय चरण: गंजमुरादाबाद जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में अस्थायी कब्जों को हटाना।
आगामी कुछ दिनों में उन्नाव, मगरवारा और शुक्लागंज में रेलवे का बड़ा दस्ता तैनात होने की संभावना है। जिला प्रशासन से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
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