रातों-रात 50 से अधिक टोटियां पार
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे सरकारी योजनाओं को सीधे निशाना बना रहे हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत योजना’ (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation) के तहत शहर के विभिन्न मोहल्लों में लगाए गए नलों की टोटियों पर चोरों ने हाथ साफ करना शुरू कर दिया है। ताजा मामले में साकेतपुरी, नेहरू नगर और गोपी नाथपुरम जैसे रिहायशी इलाकों से एक ही रात में 50 से अधिक टोटियां चोरी होने की खबर ने सनसनी फैला दी है।
योजना की सफलता पर चोरों का प्रहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ड्रीम प्रोजेक्ट ‘अमृत योजना’ का मुख्य उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। उन्नाव में इस योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के साथ-साथ गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर नलों की फिटिंग की गई थी। लेकिन अब यह योजना चोरों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चोरों का गिरोह आधी रात के बाद सक्रिय होता है और बड़ी सफाई से पीतल और स्टील की महंगी टोटियों को खोलकर ले जाता है।
साकेतपुरी इलाके के निवासियों ने बताया कि सुबह जब वे पानी भरने के लिए बाहर निकले, तो देखा कि नलों से टोटियां गायब थीं और पानी सड़क पर बह रहा था। यही हाल नेहरू नगर और गोपी नाथपुरम का भी रहा, जहां गलियों में लगे स्टैंडपोस्ट से टोटियां नदारद मिलीं।
CCTV फुटेज ने खोली सुरक्षा की पोल
इस पूरी वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह चोर बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। नेहरू नगर में लगे एक निजी सीसीटीवी कैमरे में चोरी की वारदात कैद हुई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ संदिग्ध युवक मुंह पर कपड़ा बांधे हुए आते हैं और महज कुछ सेकंड के भीतर औजारों की मदद से टोटियों को उखाड़ लेते हैं।
फुटेज में चोरों की फुर्ती देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह किसी पेशेवर गिरोह का काम है जो शहर के भूगोल से अच्छी तरह वाकिफ है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब रिहायशी इलाकों में चोर इतने सक्रिय हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा?
अमृत योजना के क्रियान्वयन पर सवाल
चोरी की इन घटनाओं ने अमृत योजना के क्रियान्वयन और उसकी देखरेख पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। करोड़ों रुपये के बजट से तैयार इस बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं है। स्थानीय पार्षद और मोहल्ले के लोगों ने नगर पालिका और जल निगम के अधिकारियों को इस संबंध में कई बार सूचित किया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला।
सरकारी संपत्ति की इस तरह हो रही बर्बादी से जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का तर्क है कि एक तरफ सरकार घर-घर पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ चोरों की वजह से कीमती पानी बर्बाद हो रहा है और संसाधन नष्ट हो रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सुस्ती
घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है और जल्द ही गिरोह को पकड़ लिया जाएगा। लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रात के समय पुलिस गश्त नाममात्र की होती है, जिसका फायदा यह अपराधी उठा रहे हैं।
नेहरू नगर के एक निवासी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यह केवल टोटियों की चोरी नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था की विफलता है। अगर आज चोर मामूली टोटियां ले जा रहे हैं, तो कल वे घरों के अंदर घुसने की हिम्मत भी करेंगे।
पानी की बर्बादी और जनता की परेशानी
टोटियां चोरी होने का एक बड़ा नुकसान पानी की भारी बर्बादी के रूप में सामने आ रहा है। जैसे ही सुबह पाइपलाइन में पानी की सप्लाई शुरू होती है, जिन जगहों से टोटियां निकाली गई हैं, वहां से तेज धार के साथ पानी बहने लगता है। इससे न केवल सड़कों पर जलभराव हो रहा है, बल्कि पेयजल की भी किल्लत हो रही है। कई इलाकों में तो पानी का दबाव इतना कम हो गया है कि वह लोगों के घरों तक नहीं पहुँच पा रहा है।
निष्कर्ष और मांग
‘Truth India Times’ के माध्यम से प्रलभ शरण चौधरी यह सवाल उठाते हैं कि क्या सरकारी योजनाओं का हश्र इसी तरह होता रहेगा? क्या अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है? उन्नाव की जनता मांग कर रही है कि पुलिस इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और कबाड़ का काम करने वाले उन दुकानदारों पर भी नकेल कसे, जो इन चोरी की गई सरकारी संपत्तियों को खरीदते हैं।
अमृत योजना को सफल बनाना केवल पाइप बिछा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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