आर्थिक तंगी से जूझ रहे 58 वर्षीय व्यक्ति ने दी जान
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला पहलीखेड़ा में शुक्रवार की शाम एक 58 वर्षीय व्यक्ति ने अपने घर के अंदर फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। घर का चूल्हा जलने की चिंता और हाथ में काम न होने के मानसिक बोझ ने एक हसंते-खेलते बुजुर्ग को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
फैक्ट्री बंद हुई तो बंद हो गए खुशियों के दरवाजे
मृतक की पहचान जगजीवन (58 वर्ष) पुत्र छेदीलाल रैदास के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, जगजीवन लंबे समय से एक स्थानीय फैक्ट्री में मजदूर के तौर पर कार्यरत थे। वे अपने परिवार के मुख्य आधार थे और कड़ी मेहनत से घर की जिम्मेदारियां निभाते थे। लेकिन पिछले कुछ समय से फैक्ट्री में काम बंद हो जाने या उन्हें काम न मिल पाने के कारण परिवार की माली हालत बिगड़ने लगी थी।
घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे की कमी और बढ़ती उम्र में नए रोजगार की तलाश न पूरी हो पाना जगजीवन के लिए गहरा मानसिक आघात साबित हुआ। वे पिछले कई दिनों से गुमसुम रहने लगे थे और आर्थिक संकट को लेकर खासे तनाव में थे।
शाम को घर के अंदर मिला शव
शुक्रवार शाम जब घर के सदस्य अन्य कार्यों में व्यस्त थे, तभी जगजीवन ने कमरे के अंदर जाकर फांसी लगा ली। काफी देर तक कोई हलचल न होने पर जब परिजनों ने अंदर जाकर देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जगजीवन का शव फंदे से लटका हुआ था। चीख-पुकार सुनकर मोहल्ले के लोग भी वहां जमा हो गए। सूचना पाकर सदर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को फंदे से नीचे उतारा।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
कोतवाली प्रभारी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके का मुआयना किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में मामला आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या का लग रहा है। हालांकि, पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों और समय की पुष्टि की जाएगी।
महंगाई और बेरोजगारी ने छीना ‘घर का सहारा’
जगजीवन की मौत के बाद पहलीखेड़ा मोहल्ले में मातम पसरा है। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर गहरा दुख और गुस्सा भी है। लोगों का कहना है कि जगजीवन बेहद मिलनसार और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने कभी किसी से कोई शिकायत नहीं की, लेकिन अंदर ही अंदर आर्थिक तंगी उन्हें खाए जा रही थी।
पड़ोसियों का आरोप है कि जिले की फैक्ट्रियों में स्थानीय मजदूरों की छंटनी और काम की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। बढ़ती महंगाई के दौर में जब घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है, तो मध्यम आयु वर्ग के लोगों के लिए मानसिक संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है।
समाज के लिए एक चेतावनी
यह घटना केवल एक व्यक्ति की आत्महत्या नहीं है, बल्कि हमारे समाज और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एक 58 वर्षीय व्यक्ति, जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर था, उसे अगर काम न मिलने के कारण जान देनी पड़े, तो यह रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि जगजीवन जैसे गरीब मजदूरों के लिए विशेष आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई दूसरा पिता या पति बेबसी के कारण मौत को गले न लगाए।
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