योगी जी! आपके आदेश की ‘बत्ती’ बना रहे लेखपाल पंकज मिश्रा; गरीबों को दुत्कार और ‘प्राइवेट सेना’ से पैमाइश का खेल, क्या यही है सुशासन?

: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ भ्रष्टाचार पर ‘बुलडोजर’ चलाने का दावा करते हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं के विभाग के ‘छोटे प्यादे’ उनकी साख पर कालिख पोतने में जुटे हैं। ताजा मामला उन्नाव जनपद के तहसील सदर क्षेत्र का है, जहाँ मजरा पीपरखेड़ा (गैर एहतमाली) के लेखपाल पंकज मिश्रा ने मुख्यमंत्री के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। आलम यह है कि जिस काम के लिए सीएम ने नायब तहसीलदारों को जवाबदेह बनाया था, उसे यह लेखपाल अपनी ‘प्राइवेट सेना’ के जरिए पैसे की दम पर सरेआम अंजाम दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल की दबंगई और भ्रष्टाचार ने इलाके को ‘मिनी पाकिस्तान’ जैसी अराजकता की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।


सीएम के आदेश को ठेंगा: नायब तहसीलदार गायब, लेखपाल का ‘राज’

कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू-राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा आदेश जारी किया था। आदेश के मुताबिक, अब खेतों की पैमाइश केवल नायब तहसीलदारों की देखरेख में ही होगी। लेकिन उन्नाव के इस इलाके में कानून नहीं, बल्कि लेखपाल पंकज मिश्रा का सिक्का चलता है। बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी के आदेश और बिना नायब तहसीलदार की मौजूदगी के, पंकज मिश्रा अपने चहेते ‘प्राइवेट लेखपालों’ (दलालों) को लेकर खेतों की मेड़ फांद रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पंकज मिश्रा खुद को सरकार से ऊपर समझने लगे हैं?

“तुम्हारे खेत नापने का ठेका नहीं लिया” – गरीबों पर कहर

मजरा पीपरखेड़ा के पीड़ित ग्रामीणों ने जो आपबीती सुनाई है, वह रूह कंपा देने वाली है। आरोप है कि जब कोई गरीब किसान अपने खेत की सही पैमाइश की गुहार लगाता है, तो लेखपाल पंकज मिश्रा उसे सरेआम बेइज्जत करते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, लेखपाल साहब का साफ कहना है— “तुम्हारे खेत नापने का ठेका नहीं लिया है।” लेकिन जैसे ही मामला किसी दबंग या पैसे वाले का आता है, लेखपाल की फुर्ती देखने लायक होती है। पैसे की खनक मिलते ही लेखपाल अपनी प्राइवेट टीम के साथ मौके पर पहुँच जाते हैं और नक्शे की ऐसी-तैसी करते हुए मेड़ को इधर से उधर खिसका देते हैं। क्या उन्नाव प्रशासन ने इस लेखपाल को गरीबों का शोषण करने का लाइसेंस दे रखा है?


‘चाय और दमआलू’ वाली मिलीभगत: तहसील में भ्रष्टाचार की दावत

सूत्रों का कहना है कि लेखपाल पंकज मिश्रा के हौसले इतने बुलंद इसलिए हैं क्योंकि तहसील के बड़े अधिकारियों के साथ उनकी ‘पक्की सेटिंग’ है। तहसील परिसर में चर्चा है कि शाम ढलते ही ‘चाय और दमआलू’ की टेबल पर भ्रष्टाचार की मलाई बांटी जाती है। जब रक्षक ही भक्षकों के साथ दावत उड़ाएंगे, तो गरीब किसान को न्याय कहाँ मिलेगा?

ग्रामीणों का आरोप है कि पंकज मिश्रा ने पूरे क्षेत्र को अपनी जागीर बना लिया है। यहाँ सरकारी नियम नहीं, बल्कि ‘सुविधा शुल्क’ की फाइलें चलती हैं। आरोप तो यहाँ तक हैं कि लेखपाल ने अपनी एक ‘प्राइवेट सेना’ पाल रखी है, जो अवैध पैमाइश के जरिए लोगों की जमीनों पर कब्जे दिलवाने का काम करती है।

मिनी पाकिस्तान बनाने की कोशिश: अराजकता का माहौल

ग्रामीणों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लेखपाल पंकज मिश्रा की कार्यशैली ने क्षेत्र को ‘मिनी पाकिस्तान’ में तब्दील कर दिया है, जहाँ न कोई कानून है और न ही किसी अधिकारी का डर। लोगों के बीच नफरत और विवाद की दीवार खड़ी कर दी गई है। छोटी-छोटी मेड़ के विवादों को लेखपाल अपनी जेब भरने के लिए और ज्यादा उलझा देते हैं, जिससे गांव में कभी भी बड़ी खून-खराबे वाली घटना हो सकती है। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?


प्रलभ शरण चौधरी की ‘तीखी’ राय (Truth India Times)

एक तरफ योगी आदित्यनाथ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करते हैं और दूसरी तरफ पंकज मिश्रा जैसे लेखपाल उनके आदेशों की धज्जियां उड़ाकर जनता का खून चूस रहे हैं। क्या जिला अधिकारी उन्नाव और उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) को यह नहीं दिख रहा कि एक लेखपाल बिना नायब तहसीलदार के कैसे पैमाइश कर रहा है? या फिर ‘चाय और दमआलू’ का स्वाद ऊपर तक जा रहा है?

यह सीधे तौर पर शासन के साथ गद्दारी है। एक लेखपाल की इतनी मजाल कि वह सीएम के आदेश को ठेंगा दिखाए और गरीबों को दुत्कारे? इसकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए और तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी की कार्रवाई होनी चाहिए।

जनता की मांग: अब आर-पार की लड़ाई

पीड़ित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि लेखपाल पंकज मिश्रा के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई और उनकी जमीनों का सही सर्वे नहीं कराया गया, तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। अब देखना यह है कि क्या उन्नाव का प्रशासन सोता रहेगा या फिर इस ‘भ्रष्ट तंत्र’ पर योगी जी का हंटर चलेगा?


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