सफाई कर्मियों को मिली शीतकालीन वर्दी, लेकिन क्या केवल ‘जैकेट’ से सुधरेगी उनकी बदहाली? पालिका प्रशासन से तीखे सवाल

उन्नाव। उत्तर प्रदेश में जारी कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच उन्नाव नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने एक सराहनीय पहल करते हुए दो दर्जन से अधिक सफाई कर्मियों को शीतकालीन वर्दी और गर्म सामग्री वितरित की है। पालिका परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ‘स्वच्छता के सिपाहियों’ को कड़ाके की ठंड से राहत देना था। लेकिन, जहाँ एक ओर इस कदम की प्रशंसा हो रही है, वहीं दूसरी ओर ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ नगर पालिका की कार्यप्रणाली और सफाई कर्मियों की बुनियादी समस्याओं पर प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग करता है।

सम्मान की वर्दी या महज रस्म अदायगी?

नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने सफाई कर्मियों को गर्म जैकेट और स्वेटर वितरित करते हुए उन्हें शहर की स्वच्छता की ‘रीढ़’ बताया। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी हो या हाड़ कंपा देने वाली ठंड, ये कर्मचारी बिना रुके शहर को साफ रखने में जुटे रहते हैं। उनका मनोबल बढ़ाना पालिका की प्राथमिकता है।

निश्चित रूप से, कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे सुबह-सुबह झाड़ू लगाने वाले कर्मियों के लिए यह गर्म कपड़े एक बड़ी राहत हैं। लेकिन यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या केवल 24-25 (दो दर्जन) कर्मचारियों को वर्दी बांटने से पूरे शहर की सफाई व्यवस्था और सैकड़ों कर्मियों का भला हो जाएगा? बाकी बचे सैकड़ों आउटसोर्सिंग और संविदा सफाई कर्मियों का क्या, जो आज भी बिना दस्तानों, बिना जूतों और बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के कूड़े के ढेरों में हाथ डालने को मजबूर हैं?

जवाबदेही: बजट और बुनियादी सुविधाओं का गणित

नगर पालिका प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सफाई बजट का कितना हिस्सा इन कर्मियों के कल्याण पर खर्च होता है। वर्दी वितरण एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन प्रशासन को निम्नलिखित बिंदुओं पर जवाबदेह होना पड़ेगा:

  1. सुरक्षा उपकरणों का अभाव: शहर में आज भी कई सफाई कर्मी बिना ‘ग्लव्स’ (दस्तानों) और ‘मास्क’ के काम कर रहे हैं। क्या प्रशासन उनके स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है?
  2. वेतन में देरी: अक्सर शिकायतें आती हैं कि संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों का वेतन समय पर नहीं मिलता। क्या शीतकालीन वर्दी उनके खाली पेट की भूख और परिवार की जरूरतों का विकल्प बन सकती है?
  3. स्वास्थ्य बीमा और सुरक्षा: नाले-नालियों की सफाई करने वाले इन ‘स्वच्छता दूतों’ के लिए क्या पालिका के पास कोई प्रभावी स्वास्थ्य बीमा योजना है? अगर कार्य के दौरान उन्हें कोई गंभीर संक्रमण होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

‘स्वच्छ उन्नाव’ का सपना और हकीकत

पालिकाध्यक्ष ने ‘स्वच्छ और सुंदर उन्नाव’ का जो सपना साझा किया है, वह तभी पूरा होगा जब शहर के कूड़ा प्रबंधन (Waste Management) की समस्या जड़ से खत्म होगी। केवल कर्मचारियों को वर्दी पहना देने से शहर की गलियों में जमा कचरा कम नहीं होगा। इसके लिए आधुनिक मशीनों, कूड़ा निस्तारण प्लांट और हर वार्ड में नियमित गश्त की जरूरत है।

समारोह में वर्दी पाकर सफाई कर्मियों के चेहरे पर मुस्कान तो दिखी, लेकिन उनके मन में अपने भविष्य और आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई संशय बरकरार हैं। कर्मियों ने आभार जताते हुए दबे स्वर में यह भी मांग की कि उन्हें नियमित रूप से आवश्यक उपकरण और सुविधाएं मिलनी चाहिए, न कि केवल विशेष अवसरों पर।

प्रशासन के नाम जनता का संदेश

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पालिका को ‘फोटो इवेंट्स’ से आगे बढ़कर सफाई कर्मियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वर्दी वितरण केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहकर हर उस व्यक्ति तक पहुँचे जो रात के अंधेरे और सुबह की ओस में शहर को चमकाने निकलता है।

नगर पालिका परिषद उन्नाव को अपनी इस पहल को एक व्यापक अभियान बनाना चाहिए। केवल वर्दी नहीं, बल्कि ‘सम्मानजनक जीवन’ इन सफाई कर्मियों का अधिकार है। शासन और प्रशासन की असली सफलता तभी मानी जाएगी जब सफाई कर्मियों को उनके हक का वेतन, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सम्मान समय पर मिले।


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