दोस्ती का 'खूनी' अंत: पत्नी के इश्क में अंधे दोस्त ने ही घोंटा विपिनेश का गलादोस्ती का 'खूनी' अंत: पत्नी के इश्क में अंधे दोस्त ने ही घोंटा विपिनेश का गला
उन्नाव (अजगैन)। कहते हैं दोस्त, भाई से बढ़कर होता है, लेकिन उन्नाव के अजगैन में जो हुआ उसने दोस्ती के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है। यहाँ एक ‘आस्तीन के सांप’ ने अपने ही दोस्त को शराब पिलाकर मौत की नींद सुला दिया। वजह थी—मृतक की पत्नी से आरोपी का अवैध प्रेम संबंध। इश्क, रंजिश और साजिश की इस खौफनाक दास्तां का खुलासा करते हुए उन्नाव पुलिस ने दो आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
लापता विपिनेश का ‘नहर किनारे’ मिला अंत
घटना 21 दिसंबर की है। कुशुम्भी निवासी विपिनेश सुबह घर से काम के लिए निकला था, लेकिन वह शाम को घर नहीं लौटा। परिजनों की बेचैनी बढ़ी और मामला पुलिस तक पहुँचा। जब पुलिस ने सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन की मदद से कड़ियाँ जोड़ीं, तो सच ने सबके होश उड़ा दिए। विपिनेश गायब नहीं हुआ था, बल्कि उसके सबसे भरोसेमंद दोस्तों—अजय और विशाल ने उसे मौत के घाट उतार दिया था।
साजिश: शराब, नशा और फिर ‘कत्ल’
पूछताछ में आरोपियों ने जो बताया वह रोंगटे खड़े करने वाला है। आरोपी अजय का विपिनेश की पत्नी के साथ लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। विपिनेश इस रिश्ते में सबसे बड़ी बाधा था। इस ‘कांटे’ को रास्ते से हटाने के लिए अजय ने अपने दोस्त विशाल के साथ मिलकर मौत का जाल बुना।
21 दिसंबर की रात विपिनेश को शराब पार्टी के बहाने जंगल में बुलाया गया। जब विपिनेश नशे में पूरी तरह बेसुध हो गया, तब अजय और उसके साथियों ने मिलकर उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने शव को मोटरसाइकिल पर लादा और मेढ़ी टीकर गांव के पास नहर पटरी के किनारे फेंक दिया। इतना ही नहीं, पुलिस को गुमराह करने के लिए विपिनेश की साइकिल और मोबाइल भी अलग-अलग जगहों पर छिपा दिए गए।
पुलिस और समाज के लिए खड़े हुए 5 बड़े सवाल:
- अवैध संबंधों का खूनी अंजाम: क्या समाज में बढ़ते अनैतिक संबंध अब जघन्य अपराधों की मुख्य वजह बनते जा रहे हैं? इस पर अंकुश लगाने के लिए सामाजिक जागरूकता कहाँ है?
- सरेआम ‘पार्टी’ और अपराध: रात के अंधेरे में जंगल और सुनसान इलाकों में शराब की पार्टियां होती हैं, जहाँ अपराध जन्म लेते हैं। क्या पुलिस की ‘नाइट गश्त’ केवल सड़कों तक सीमित है?
- अपराधियों में कानून का खौफ क्यों नहीं? हत्या के बाद शव को मोटरसाइकिल पर लादकर हाईवे और नहरों तक ले जाया जाता है। क्या रास्तों में कोई चेकिंग या बैरियर नहीं था?
- सर्विलांस पर निर्भरता: पुलिस अक्सर घटना होने के बाद मोबाइल लोकेशन से जांच शुरू करती है। क्या ‘प्री-क्राइम इंटेलिजेंस’ जैसी कोई व्यवस्था है जो ऐसे संदिग्धों पर पहले से नजर रख सके?
- फास्ट ट्रैक ट्रायल की मांग: क्या सरकार और न्यायपालिका इस संवेदनशील मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाएगी ताकि विपिनेश के बूढ़े माता-पिता और मासूम बच्चों को जल्द इंसाफ मिल सके?
पुलिस की सफलता: एसपी के निर्देशन में खुला राज
एसपी जयप्रकाश सिंह के निर्देश पर अजगैन पुलिस और सर्विलांस टीम ने बेहतरीन तालमेल दिखाया। अपर पुलिस अधीक्षक प्रेमचंद ने बताया कि आरोपियों की निशानदेही पर शव और हत्या में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद कर ली गई है। पुलिस अब इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि क्या इस साजिश में मृतक की पत्नी की भी कोई भूमिका थी?
निष्कर्ष: भरोसे का कत्ल
विपिनेश हत्याकांड केवल एक मर्डर नहीं है, बल्कि यह भरोसे का कत्ल है। यह घटना चेतावनी है उन लोगों के लिए जो अपनों पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। समाज को सोचना होगा कि ‘सभ्य’ होने के दावों के बीच हम किस दिशा में जा रहे हैं। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया है, लेकिन क्या कानून ऐसी सजा देगा जो भविष्य में किसी अजय और विशाल को ऐसी हिमाकत करने से रोके?
रिपोर्ट: [प्रलभ शरण चौधरी/Truth India Times]
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